
हैदराबाद की जंगलो में हो रही महाविनाश
कोर्ट में मामले के रहने के बाद भी रातोंरात पेड़ क्यों काटेगए इतनी जल्दीबाजी क्यों क्या राज्य ने पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का असेसमेंट सर्टिफिकेट लिया जो छात्रों के ऊपर जबरन कार्यवाही हुई उसका हिसाब कैसे होगा कुछ यही सवाल सुप्रीम कोर्ट ने पूछा 2 अप्रैल को तेलंगाना के मुख्य सचिव से ऐसे में आइए जानते हैं कि यह पूरा विवाद क्या है
हैदराबाद के जंगलो में हो रही महाविनाश सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पास 400 एकड़ एकड़ जमीन की प्रस्तावित नीलामी को लेकर तेलंगाना में बड़ा विवाद खड़ा हो गया छात्र और पर्यावरण कार्यकर्ता आईटी पार्क के लिए जमीन खाली करने के राज्य सरकार के फैसले का विरोध करने लगे मामला तेलंगाना राज्य के उच्च न्यायालय के समक्ष लाया गया अब जान लेते हैं कि यह विवाद हुआ कहां से शुरू दरअसल विवाद दशकों पुराना है हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दावा है
कि 400 एकड़ जमीन 1975 में उसे आवंटित 2324 एकड़ जमीन का एक हिस्सा है हालांकि 2022 में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस जमीन को यूनिवर्सिटी को हस्तांतरित करने का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा और पुष्टि की कि जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास ही है तो ऐसे में एक बात तो साफ हो गई कि यह जमीन सरकारी है हैदराबाद के जंगलो में हो रही महाविनाश सेंट्रल यूनिवर्सिटी का नहीं है यह बात तो रही
यूनिवर्सिटी के जमीन की अब छात्रों औरएनवायरमेंटलिस्ट्स का तर्क यह है कि यह जमीन इकोलॉजिकली बहुत संवेदनशील है यानीसेंसिटिव है उनका दावा है कि यह मोर भैंस झील और मशरूम चट्टानों सहित वनस्पतियों और
जीवों की 455 से अधिक प्रजातियों का घर है तो फिर इन प्रजातियों के लिए वात फाउंडेशन ने आवाज उठाई है ये भारत फाउंडेशन एक गैर सरकारी संगठन है और इसके कार्यकर्ताओं ने एक याचिका दायर की है
जिसमें मांग की गई है कि इस भूमि को वन्य जीव संरक्षणअधिनियम यानी वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नेशनल पार्क घोषित किया जाए वे चाहते हैं कि इसे डीम्ड फॉरेस्ट का दर्जा दिया जाए इसके अलावा रिपोर्ट्स के मुताबिक
मंगलवार को छात्रों ने भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन यानी टीजी डबल आईसी को सरकार द्वारा जमीन अलॉट करने से रोकने के लिए जनहित याचिका दायर की हाई कोर्ट यात्रियों की याचिका और वाद फाउंडेशन की पहले की याचिका दोनों पर सुनवाई करने वाला था
मगर इससे पहले ही तेलंगाना सरकार ने जमीन को साफ करना शुरू कर दिया और यहीं पर सबसे बड़ी गड़बड़ी हुई
जब यह मामला अभी कोर्ट में ही अटका हुआ था तो फिर बुलडोजर और अर्थ मूवर तैनात क्यों किए गए पेड़ क्यों काटे गए और इसी का विरोध करने के लिए छात्र सड़कों पर उतर आए जब छात्र प्रदर्शन पर उतरे तब उनके साथ जानवरों की तरह व्यवहार किया गया कई जगह तो कपड़े फाड़ने घसीटने और धमकाने की भी बातें सामने आई हालात ऐसे हो गए
कि जानवरों को खुद ही अपने लिए सामने आना पड़ा इस तस्वीर को देखकर अब तो ऐसा ही लग रहा है अब जरा राजनीतिक उठापटक भी जान लेते हैं क्योंकि यह भूमि का मुद्दा राजनीतिक लड़ाई में भी बदल चुका है तेलंगाना के पूर्व उप मुख्यमंत्री के टी राम राव और भारतीय राष्ट्रीय समिति यानी बीआरएस के नेता ने कांग्रेस सरकार पर हैदराबाद के जंगलो में हो रही महाविनाश आखिरी ग्रीन लंग्स को नष्ट करने का आरोप लगाया है
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए केटी राम राव ने कहा कि पश्चिमी हैदराबाद में 400 एकड़ की कीमती जगह को नष्ट करके यह बेशर्मी से की गई हत्या है अगर आप सभी नहीं बोलते हैं तो इसकी जिम्मेदारी आपकी है खासतौर पर राहुल गांधी की है दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाली तेलंगाना सरकार ने अपने कदम का बचाव करते हुए यह कहा कि यह जमीन हैदराबाद विश्वविद्यालय की जमीन नहीं है
हाल ही में राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि हैदराबाद के जंगलो में हो रही महाविनाश में एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण मामला सामने आया है वह यह नहीं समझ पा रहे कि राज्य सरकार को उन पेड़ों और हरित क्षेत्र से किस तरह की दुश्मनी है कि उन्हें रात के अंधेरे में अभियान चलानापड़ रहा है राज्य सरकार को नोटिस भेजे जाने की बात करते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा हमने मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है
और हमने तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी है हम निश्चित रूप से इस मामले पर कार्यवाहीकरेंगे मंत्री भूपेंद्र भारत राष्ट्र समिति के सांसद रवि चंद्र वड्डी राजू कीओर से केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार द्वारा नष्ट किए जा रहे हरित आवरण को
सुरक्षित करने के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल का जवाब दे रहे थे अब बात कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट की सुप्रीम कोर्ट ने
गुरुवार को हैदराबाद के जंगलो में हो रही महाविनाश यूनिवर्सिटी के पास की जमीन पर किसी भी तरह की गतिविधि पर रोक लगा दी है कोर्ट ने कहा तेलंगाना सरकार को जमीन पर पेड़ों की सुरक्षा के अलावा कोई गतिविधि नहीं करनी चाहिए
जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य में पेड़ों की कटाई को बहुत ही गंभीर बताया पीठ ने कहा तेलंगाना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट इसकी खतरनाक तस्वीर दिखाती है रिपोर्ट से पता चलता है कि बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं इसके अलावा पीठ ने तेलंगाना के मुख्य सचिव से यूनिवर्सिटी के पास की जमीन पर पेड़ काटकर काम शुरू करने की जल्दी पर जवाब मांगा है साथ ही पूछा है
कि क्या राज्य में इस तरह की गतिविधियां यानी पेड़ों की कटाई के लिए पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का असेसमेंट सर्टिफिकेट लिया है अब इंतजार 16 अप्रैल का कि आखिरकार तेलंगाना सरकार क्या जवाब देगी सुप्रीम कोर्ट के उठाए गए इन सवालों का तो ऐसे में आप इस पूरे वाक्य को लेकर के क्या कुछ सोचते हैं छात्र जब सड़कों पर उतरे उनके साथ जो बर्बरता हुई उसको लेकर के आपकी क्या राय है
जानवर अब खुद अपनी बचाव के लिए लगातार जो वहां पर अर्थ मूवर्स लगाए गए हैं जो बुलडोजर्स लगाए गए हैं उनसे टकरा रहे हैं तो ऐसे में इन तमाम चीजों को लेकर के आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर दें बाकी के अपडेट्स के लिए देखते रहिए इन खबर धन्यवाद